कल वो आई थी


हम मान जाएंगे


यू हाथो में हाथ लेकर, बातो पर हँसी की परत चढ़ाकर, आँखो से ऑंखे मिलाकर भरोसा मत दिलाओ, हम मान जाएंगे, अपने खालीपन को भरने के लिए, यू हमे मत समझाओ, हम समझ जाएंगे, वो जज़्बात जो एक अरसे सो सोये हुए हैं, इन्हें इतना मत छेड़ो, वो जाग जाएंगे, आप फिरसे वफ़ा करने का... Continue Reading →

वास्तविकता


पत्थर के दिल है, शीशे की जुबानें धुँए के शहर हैं,प्यार की दुकानें बोतल मे पानी,डब्बे मे हवा, झूठी मुस्काने , जीने की दवा, अकेला मुसाफिर है,रास्तो पर भीड़ सबकी अपनी दुनिया है,सबकी अपनी सीध सबके अपने मतलब,सबके जरूरी काम जब ज़रूरत पड़े,सबको सीधी राम राम सामने मेरा सबकुछ तु,तू है मेरी जान पलके झपकी... Continue Reading →

आज बस रोना चाहता हूँ


ये freeverse poetry है, जिसमे rhyming नही होती लेकिन कवि अपनी दिल की सब बातें लिखता है आज कुछ लिखने का मन नही है आज फिर मेरी अपेक्षाओं ने मुझे धोखा दिया, फिर मैं खुद से नफरत करने लगा हूँ, फिर से मैं ,अंदर ही अंदर घुटने लगा हूँ, सब कुछ भूल के अश्रु के... Continue Reading →

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