दिल का रिश्ता


मिल जाएं तो बातें
बिछड़ जाएं तो यादें

रिश्ता ये कैसा है नाता ये कैसा है
पहचान जिससे नही थी कभी
अपना बना है वही अजनबी
रिश्ता ये कैसा है नाता ये कैसा है

तुम्हे देखते ही रहूं मैं
मेरे सामने यूं ही बैठे रहो तुम
करूं दिल की बाते मैं ख़ामोशियों से
और अपने लबों से ना कुछ कहो तुम

ये रिश्ता है कैसा ये नाता है कैसा
तेरे मन की खुशबू भी लगती है अपनी
ये कैसी लगन है ये कैसा मिलन है
तेरे दिल की धड़कन भी लगती है अपनी

तुम्हे पाकर ये महसूस होता है ऐसे
की जैसे कभी हम जुदा ही नहीं थे
ये माना कि जिस्मो के घर तो नये हैं
मगर हैं पुराने ये बंधन दिलो के

रिश्ता ये कैसा है नाता ये कैसा है

रमन उपाध्याय

25 thoughts on “दिल का रिश्ता

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेरी कविताओं में रुचि रखने के लिए हमें अच्छा लगा आपका comment पढ़के..

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    1. These vry sweet and heart touching poems .
      I m so happy its write you.
      What is this relationship nd how does feel.❤❤❤❤🙏🙏🙏🙏

      Liked by 5 people

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