मेरे एहसास


मेरी हर याद में तुम हो,
मेरी हर बात में तुम हो,
रातो को आते हैं जो मुझे,
उन सुहाने ख्वाब में तुम हो।

चलना तुम हमेशा मेरे साथ,
रख कर मेरे हाथो में हाथ,
करती रहना बस प्यार भरी बात,
ढल जाये दिन या हो जाये रात,
मैं समझूँगा तेरे हर जज़्बात,
खूब करेंगे हम अपने सपनो की बात।

स्वर्ग से भी सुन्दर,
तुम्हारा ये प्रेम जाल,
Whatsapp पे chats करेंगे,
और कॉल पर खूब सारी बात,
बताओ न फिर किस बात का इंतज़ार।

मैं तेरा राँझा और तू मेरी हूर,
चल चले कही फिर सारी दुनिआ से दूर,
प्यार का नशा हो और तेरे चेहरे का नूर,
छाया हो हम पर बस इश्क का फितूर।

दूर जाने का हो न कभी गम,
नही होगा कभी ऐसा क्यूंकि,
ये प्यार नही होगा कभी कम,
ना होगी तू कभी दुखी,
और न होगी तेरी आँखें नम।

हम रहेंगे हमेसा संग,
साथ देंगे हर कदम हर दम,
ऐसा कहकर मत करना मेरी आँखे नम,
वरना ये सांसे जाएंगी अभी थम,
जितनी तारीफ करूँ तुम्हारी उतनी है कम,
तो फिर कह दो एक दूजे के लिए हैं हम।

मुझे खबर है कि तुम क्या चाहती हो,
मेरे हाथों की लकीरों में अपना नाम चाहती हो,
रखलो हमे अपनी बाहों में कैद करके,
मुझे पता था तुम यही अंजाम चाहती हो।

जान – ए – वफ़ा , जान – ए – जहां हो तुम,
इस खुशनुमा जिंदगी की वजह हो तुम,
इस मरीज़ के इश्क़ की दवा बनी हो,
हमसफ़र हमराही हमनवा हो तुम।

रमन उपाध्याय

15 thoughts on “मेरे एहसास

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