क्या सपना था


तो दोस्तों हुआ कुछ यूं ,

dream

शाम का समय हो चुका था, हम सभी अपने अपने कार्य से निवृत्त होकर घर आ चुके थे-पिताजी अपना दूरभाष लेकर अपने मित्रों से संपर्क कर रहे थे,और रोज़ की तरह माताजी भोजन को तैयारी में व्यस्त हो गई,मेरे पास कुछ आवश्यक कार्य थे , जिनको मैंने शीघ्र संपन्न किया , और बाहर अपने दुपहिया वाहन पर निकल पड़ा सैर करने के लिए,

शीतल हवाएं चल रही थी, मैं मन्द गति से शीतल हवाओं का आनंद ले रहा था,आकाश शांत था, जैसे कितना थका था, और सो रहा था, छोटे छोटे टिमटिमाते हुए तारे, जो कि रोज़ की तरह निकले थे, लेकिन आज कुछ ज़्यादा सुंदर लगरे थे, मन बहुत खुश था,

dream 2

तभी अचानक घर से दूरभाष आया, और मै चल पड़ा घर की ओर,घर गया तो पता चला कि मैंने जो नौकरी के लिए आवेदन किया था, उसकी ट्रेनिंग पर जाने का समय निकट था, उसका आवेदन पत्र डाक द्वारा घर आ चुका था, अगले ही दिन मुहे ट्रेनिंग के लिए निकालना था , शहर के व देश भर के लोग वहां पर आने वाले थे , मेरे लिए वहां जाना किसी आश्चर्य से कम नहीं था, अपना सामान लेकर मैं निकल पड़ा, मैं बहुत खुश था , वहां के बारे में खयाली पुलाव पका रहा था, के ऐसा होगा वैसा होगा,विशालकाय इमारतें होंगी , बड़े बड़े कक्ष होंगे, पेड़ होंगे , पौधे होंगे, तभी पता चला के मेरा गंतव्य स्थान आ चुका था,

मैं यातायात के वाहन से उतरा,इमारत के मुख्य द्वार पर एक नीली वेशभूषा पहरे एक व्यक्ति खड़ा था, जो सबके प्रवेश पत्र देख कर, सबको प्रवेश की अनुमति दे रहा था, मैं भी अंदर चला गया, मैंने कुछ लोगो से परिचय किया , तत्पश्चात एक व्यक्ति सूची लेकर आया, उसमे सभी आवेदकों के नाम लिखे थे, वह सूची सभी के निवास कक्षों की थी, जो ट्रेनिंग के तहत हमें निवास के लिए दिए गए थे,कक्ष का पता लगते ही, हम अपने कक्ष में अपना सामान रख कर , प्रशिक्षण(ट्रेनिंग) पर जाने के लिए बाहर आ गए, तभी एक सुंदर युवती की ओर मेरी नज़र पड़ी,

उसके चेहरे पर एक भोलापन था, मोटी मोटी आंखे , उसके सुंदर केश उसके घुटनों तक आ रहे थे, उसको देख कर मैं स्तब्ध रह गया, मेरे अंतर्मन में जगजीत सिंह जी की एक ग़ज़ल चलने लगी

– आपको देख कर देखता रह गया

क्या कहूं और कहने को क्या रह गया।

dream 3

पहली नज़र में में उसपर मोहित हो गया,परंतु साहस ना होने की वज़ह से मैंने सामान्य रहना ही उचित समझा ,ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद मैं दैनिक कार्यों में लग गया, और प्रतिदिन मैं उसको देखता, लेकिन बात ना कर पाता, एक दिन मैं अपने कक्ष से प्रशिक्षण के लिए शीघ्र निकल गया और प्रशिक्षण द्वार पर पहुंचा तो देखा तो वो युवती पहले ही अंदर बैठी हुई थी, मैं डरा और खुश भी हुआ, अब मेरी समझ में नहीं आया के क्या करूं, मैं धीरे से दीवार के सहारे अंदर गया और अपना स्थान पर जाकर शांत बैठ गया,और जैसे ही मौका मिलता , मैं उसको निहारता ,कुछ समय बीत जाने पर उससे कुछ बात कहने की हिम्मत जुटी, और उसी क्षण उसने मेरी तरफ देख लिया, जैसे ही उसने मुझे देखा मैं सहम गया, मेरी सांसे रुक गई, मेरी। आंखों की पुतलियां अपने सामान्य आकार से बड़ी हो गई , मेरी हिम्मत समाप्त हो गई थी, अब कहीं न कहीं उस आभास हो गया था, कि वो मेरा आकर्षण है , परंतु वो शांत रही, कुछ समय बाद मुझे मौका मिला, जब हमारे शिक्षक ने हमें एक गतिविधि दी, जिसके द्वारा मुझे उससे बात करने का मौका मिला,
सर्वप्रथम मैंने पूछा कि – नाम क्या है आपका।
उसने शीघ्रता से उत्तर दिया – नेहा शर्मा।
उसके बाद मैंने शिक्षा के बारे में पूछा – इन्हीं सब बातों में मेरी और उसकी बात करनें का संकोच समाप्त हो गया था,।

उस दिन मैं बहुत खुश था, पता नहीं जैसे मुझे क्या मिल गया था, जैसे ही कक्षा समाप्त हुई, मैंने उसके सामने बगीचे की ओर चलने का प्रस्ताव रखा, उसने भी मना नहीं करी, और हम बगीचे की ओर चल पड़े, मैंने उसे कई प्रकार के पौधों के बारे में बताया , उसे कहीं न कहीं मेरी ये बेमतलब की बातें पसंद आयी- शायद कहीं न कहीं उसे भी मुझसे प्रेम हो गया था(मुझे तो पहले ही हो चुका था)। परंतु मैंने उसे कुछ नहीं कहा -सांय का भोजन का समय हो चुका था , मैंने भोजन के लिए पूछा – और हम भोजन के लिए चल दिए। भोजन के पश्चात हम अपने अपने कक्ष में गए,वह दिन बहुत अच्छा गया, अगले दिन हम एक बार हम फिर मिले, और अब मैं सोच चुका था कि आज मैं उससे उसका पक्ष पूछूंगा , मैंने काफी समय तक अभ्यास किया कि – मैं उससे कैसे पूछूं । मैं उसके पास गया और

dream university

मैंने सहज स्वभाव में कहा -नमस्कार ! कैसे हो आप

उसने कहा – मैं ठीक हूं ! तुम बताओ।

मैंने कहा – मैं भी ठीक ही हूं ।

उसने कहा – ठीक ही हूं से क्या तात्पर्य है तुम्हारा। लगता है तुम कुछ कहना चाहते हो ।

मैंने कहा – हां कहना तो चाहता हूं , परंतु कैसे कहूं समझ नी आ रहा । शायद कहीं आपको बुरा न लग जाए।

उसने कहा – नहीं नहीं मुझे बुरा नहीं लगेगा – तुम कहो क्या कहना चाहते हो।

न जाने क्यों मैं जब बोलने वाला था – मेरी आवाज़ नहीं निकली – मैं वापस सांस लेकर बोलने की कोशिश करने लगा – मैं हकलाने लगा –

मैं मैं तुमसे ब ब ब भूत , बहुत प प प प प्यार क क क करता हूं – ये बोलने क बाद मेरी सांस में सांस आती

नेहा बहुत हंसी – काफी देर तक हंसी फिर नेहा ने कहा की – मुझे पहले ही पता था और हां मुझे भी तुम बहुत पसंद हो।

और इस कहानी का शीर्षक क्या है – क्या सपना था – ये सच में सपना था,😅

आंख खुलने के बाद – ये ही सोचा कितना अच्छा सपना था – अगर थोड़ी देर और आंख न खुलती तो मेरी शादी हो जाती नेहा क साथ 😅😅।

dream last

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